मैनपाट को “पर्यटन हब” नहीं, “खोदापुर” बनाने की साजिश – अमरजीत भगत का बड़ा आरोप

पूर्व मंत्री बोले – वन अधिकार पट्टे रद्द कर माइनिंग कंपनियों को लाभ, आदिवासियों के साथ खुला अन्याय

हाथोर समाचार,अंबिकापुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने सरगुजा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मैनपाट को पर्यटन हब बनाने की बजाय “खोदापुर” बनाकर बर्बाद करने की तैयारी कर रही है।

भगत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सवाल यह है कि “पर्यटन बढ़ाना है या पहाड़ खोदकर तबाह करना है?”
उनके अनुसार, मैनपाट प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है, लेकिन कुछ लोग इसे खोद-खोदकर अपने निजी हित साधने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा मैनपाट उजड़ जाएगा और स्थानीय जनता को केवल धूल, प्रदूषण और नुकसान ही मिलेगा।

वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन होने का दावा

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत स्थानीय आदिवासी एवं वनवासियों को जो पट्टे दिए गए थे, उन्हें बिना किसी सुनवाई और बिना किसी ठोस आधार के रद्द किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हमने जो पट्टे बांटे वो फर्जी हो गए, और अब उन्हीं रद्द किए गए पट्टों की जमीन को माइनिंग कंपनियों को देना सही बताया जा रहा है। आखिर इसमें स्थानीय लोगों को क्या लाभ मिल रहा है? कुछ नहीं… सिर्फ धूल और तबाही!”

कट-ऑफ डेट का उल्लंघन

अमरजीत भगत ने याद दिलाया कि वन अधिकार कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि 31 दिसंबर 2005 तक जो लोग जंगल भूमि पर काबिज थे, उन्हें पट्टा दिया जाना चाहिए था।
लेकिन अब उन्हीं पट्टों को निरस्त कर माइनिंग लीज जारी करना, उनके अनुसार, कानून की मूल भावना और आदिवासी हितों के खिलाफ है।

उन्होंने मांग की कि सरकार इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट जवाब दे, मैनपाट में प्रस्तावित खदानों को तत्काल रोका जाए और आदिवासियों के हक–अधिकारों का सम्मान किया जाए।

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