बिट्टू सिंह राजपूत, सूरजपुर। प्रतापपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोटया से सामने आया मामला शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहां भ्रष्टाचार किसी परदे के पीछे नहीं, बल्कि खुलेआम, बेशर्मी के साथ किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि की खुली लूट मची हुई है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर तमाशा देख रहे हैं।


जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में जिला पंचायत और जनपद पंचायत निधि से शिव चर्चा भवन का निर्माण कराया गया था। इसी के ठीक बगल में एक शौचालय भी बनाया गया, जिसकी स्थिति खुद ही भ्रष्टाचार की गवाही दे रही है। महज 4 फीट लंबाई-चौड़ाई का यह शौचालय अंदर से अधूरा है, न तो इसका निर्माण पूर्ण हुआ और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अधूरे निर्माण के बावजूद पंचायत के सरपंच-सचिव ने 15वें वित्त आयोग की राशि से करीब एक लाख रुपये का भुगतान अर्चना सिंह के खाते में कर दिया।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया गया है। शौचालय का सेफ्टी टैंक आज भी अधूरा और खुला पड़ा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य केवल कागजों में पूरा दिखाकर राशि का बंदरबांट किया गया है। इतना ही नहीं, शौचालय में पानी की कोई व्यवस्था तक नहीं की गई, जो इसकी उपयोगिता पर भी सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। एक भाजपा नेता के संरक्षण में पंचायत के सरपंच और सचिव खुलेआम सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। यही कारण है कि संबंधित अधिकारी भी कार्रवाई करने के बजाय उल्टा कार्य का मूल्यांकन कर बिल पास करने में लगे हुए हैं। यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और मिलीभगत की ओर साफ इशारा करती है।
मामला केवल शौचालय तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि शिव चर्चा भवन निर्माण में भी भारी अनियमितताएं हुई हैं। यदि निष्पक्ष और ईमानदारी से जांच की जाए तो 15वें वित्त आयोग की राशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का खुलासा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार के तथाकथित सुशासन में ऐसे भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई होगी या फिर दोषियों को संरक्षण मिलता रहेगा। क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?



