बेरिकेड्स पर खड़ा भ्रष्टाचार! बसंतपुर पुलिस ने सड़क को बनाया कमाई का जरिया ,सड़क सुरक्षा के नाम पर थाने के सामने रातभर उगाही, चेकिंग में प्राइवेट मजदूरों की एंट्री से कानून का मजाक

हाथोर समाचार, सरगुजा/बलरामपुर। जिले के सीमावर्ती थाना बसंतपुर की पुलिस पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। रात होते ही सड़क सुरक्षा की आड़ में थाने के ठीक सामने अवैध वसूली का खेल खुलेआम शुरू हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस कथित अवैध वसूली में पुलिसकर्मियों के साथ-साथ प्राइवेट मजदूरों की भी खुलकर भागीदारी सामने आ रही है। बेरिकेड्स लगाकर वाहनों को रोका जाता है और फिर “चेकिंग” के नाम पर राहगीरों से मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं।

राहगीरों का आरोप है कि यह इलाका अंतरराज्यीय और संवेदनशील मार्ग होने के बावजूद यहां अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के बजाय बसंतपुर पुलिस आम लोगों को निशाना बना रही है। तस्वीरों में साफ तौर पर दिख रहा है कि थाना प्रभारी के साथ मौजूद व्यक्ति कोई पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि प्राइवेट मजदूर है, जो बेरिकेड्स हटाने से लेकर वाहनों की जांच और यह तय करने तक का काम कर रहा है कि किस वाहन से कितनी रकम वसूली जाएगी। यह न सिर्फ कानून का मजाक है, बल्कि पुलिस की साख पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है।

सूत्रों के मुताबिक, रात्रि गश्त के दौरान कुछ पुलिसकर्मी खुद बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के, वह भी कथित तौर पर नशे की हालत में, वाहन दौड़ाते देखे गए हैं। लेकिन अपने विभागीय अनुशासन को दुरुस्त करने के बजाय थाना प्रभारी पर राहगीरों से अवैध वसूली में लिप्त रहने के आरोप लगातार लग रहे हैं। वहीं, अंबिकापुर–बनारस अंतरराज्यीय मार्ग से नशे की सामग्री का आना-जाना बेरोकटोक जारी है और कार्रवाई के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरे जैसी छोटी औपचारिकताएं की जा रही हैं।

इसके उलट, जिले के संवेदनशील और सख्त पुलिस अधीक्षक लगातार साफ-सुथरी और पारदर्शी पुलिसिंग के निर्देश देते रहे हैं। एसपी की यही सख्ती है, जिससे जिले की पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने की उम्मीद बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि बसंतपुर थाना क्षेत्र में चल रहे इस कथित अवैध वसूली के खेल पर उच्च अधिकारियों की नजर कब और कितनी कड़ी पड़ती है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और बलरामपुर पुलिस की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके।

बसंतपुर पुलिस के लिए ‘रोजगार कार्यालय’ बना थाना!

बसंतपुर पुलिस कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के युवकों के लिए खुले रोजगार का जरिया बनती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, थाना बसंतपुर के सामने रात के समय थाना प्रभारी के साथ जिन युवकों को वाहन चेकिंग करते देखा गया, वे उत्तर प्रदेश से आते हैं। इन युवकों को इस कार्य के लिए अच्छी-खासी मजदूरी दिए जाने की बात भी सामने आ रही है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि एक ओर छत्तीसगढ़ के युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना प्रभारी कथित रूप से दूसरे राज्य के युवकों को थाना परिसर के सामने अपने “सहयोगी” के रूप में खड़ा कर कानून से जुड़ा काम सौंप रहे हैं। यह न केवल स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय है, बल्कि पुलिस नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं की खुली अवहेलना भी मानी जा रही है।

   क्रमशः जारी….

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