अम्बिकापुर,05 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नए पंख दे रही है। जिले के अम्बिकापुर विकासखण्ड के छोटे से ग्राम पंचायत डिगमा की रहने वाली श्रीमती रत्ना मजुमदार आज उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और सरकार के सहयोग से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि स्वयं को एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया है।


पारंपरिक खेती को मिला आधुनिक विस्तार
श्रीमती रत्ना मजुमदार बताती हैं कि उनके ससुर पारंपरिक रूप से छोटे स्तर पर फूलों की खेती करते थे। समूह से जुड़ने के बाद रत्ना ने इस काम को व्यावसायिक रूप देने की ठानी। उन्होंने ‘माँ महामाया समूह’ से जुड़कर पहली बार 1,00,000 का ऋण लिया और एक एकड़ में आधुनिक तरीके से फूलों की खेती शुरू की। आज वह अपनी मेहनत के दम पर दो एकड़ में फूलों का सफलतापूर्वक उत्पादन कर रही हैं।

ड्रिप सिस्टम और वैज्ञानिक पद्धति का संगम
रत्ना ने खेती में आधुनिक तकनीक को अपनाया है। उन्होंने बताया कि उन्नत पौधे की खेती के लिए विशेष पौधे कोलकाता से मंगाए जाते हैं। ये पौधे मात्र 24 दिनों में फूल देना शुरू कर देते हैं और लगातार 3 महीने तक पैदावार देते हैं। फूलों की खेती मुख्य रूप से ‘ड्रिप इरिगेशन’ (टपक सिंचाई) के माध्यम से की जाती है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ पौधों को सटीक पोषण मिलता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे गेंदा फूल की तीन प्रमुख किस्में (लाल, नारंगी और पीला) उगा रही हैं। साथ ही, सर्दियों के मौसम में ‘चेरी’ की खेती भी करतीं हैं है।
त्योहारों में बढ़ती है मांग, साल भर होता है मुनाफा
रत्ना ने बताया है कि, नवरात्रि, शिवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान बाजार में फूलों की मांग और कीमत बढ़िया मिलता है। हालांकि सामान्य दिनों में दरें कम रहती हैं, फिर भी वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण साल भर लाभ बना रहता है। समूह से मिले ऋण को उन्होंने समय पर चुका दिया है और अब होने वाले मुनाफे को खेती के विस्तार में निवेश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कल्याणकारी योजनाओं को देते हुए कहा कि, ‘बिहान’ से जुड़कर आज हम महिलाएँ अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। सरकार की मदद से हमें जो ऋण और मार्गदर्शन मिला, जिससे आज हमें समाज में एक नई पहचान मिली है।
शासन की बिहान योजना के माध्यम से आज ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक क्रांति आ रही है। रत्ना जैसी स्वावलंबी महिलाएँ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।



