हाथोर समाचार, सूरजपुर/बलरामपुर। प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते इन दिनों जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति में सुर्खियों में हैं। विधायक पर लगे कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोप को लेकर गोड़ समाज लगातार मुखर है और अब यह मामला जिला स्तरीय समिति तक पहुँच चुका है।

गोड़ समाज का आरोप है कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने अपने पति के नाम से अनियमित तरीके से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर आदिवासी वर्ग के अधिकारों का हनन किया है। समाज का कहना है कि इससे न सिर्फ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि आदिवासी वर्ग को मिलने वाले प्रतिनिधित्व और संरक्षण से भी वे वंचित हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर समाज ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, बलरामपुर को सभी संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने और विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट के निर्देशों के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई न होने पर गोड़ समाज ने कुछ दिनों पहले सूरजपुर और बलरामपुर के कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा था। समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि विधायक के जाति प्रमाण पत्र की जांच प्रक्रिया में देरी जारी रही, तो वे बड़े आंदोलन की रणनीति अपनाएंगे। समाज की इस सक्रियता के बाद मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया, और स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई।
इसी बीच जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, बलरामपुर—रामानुजगंज द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण पत्र ने पूरे विवाद को नई दिशा दे दी। समिति ने नोटिस जारी करते हुए विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते को 27 नवंबर 2025 को पूर्वाह्न 11 बजे समिति के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख लेकर उपस्थित हों, ताकि समिति मामले की जांच को अंतिम रूप दे सके। समिति ने यह भी उल्लेख किया है कि यदि निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होती हैं, तो मामले का निर्णय उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय रूप से किया जा सकता है।
नोटिस जारी होने के बाद गोड़ समाज ने इसे अपनी “पहली जीत” बताते हुए कहा है कि न्याय की दिशा में यह बड़ा कदम है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे बड़ी कानूनी प्रगति के रूप में देख रहे हैं। अब सबकी नजरें 27 नवंबर को होने वाली निर्धारित सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस विवाद का अगला निर्णायक चरण साबित हो सकती है।



