करंट से बाघ की मौत मामले में वन विभाग को बड़ी सफलता, 6 संदिग्ध हिरासत में ,घूई वन परिक्षेत्र में अवैध शिकार का खुलासा, दो राज्यों की संयुक्त जांच, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

हाथोर समाचार ,सूरजपुर। वन मंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र घूई में बाघ की मौत के मामले में वन विभाग को अहम सफलता मिली है। इस सनसनीखेज प्रकरण में एक महिला सहित कुल छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में महिला बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड की निवासी बताई जा रही है, जिसके घर से बाघ के बाल और नाखून के टुकड़े बरामद किए गए हैं।

वन विभाग के अनुसार बाघ की मौत करंट लगने से हुई है, जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। उल्लेखनीय है कि बाघ की मौत की जानकारी सामने आते ही पूरे छत्तीसगढ़ के वन महकमे में हड़कंप मच गया था। घटना की सूचना मिलने के बाद छत्तीसगढ़ वन विभाग के साथ-साथ मध्यप्रदेश टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की गई।

सोमवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका था, जिसके बाद मंगलवार को विभिन्न स्थानों से विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों को बुलाया गया। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बाघ की मौत करंट की चपेट में आने से हुई है। पोस्टमार्टम के पश्चात अधिकारियों और चिकित्सकों की उपस्थिति में जंगल में ही बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई।

जांच के दौरान घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत परसडीहा में एक महिला के घर से बाघ के नाखून और बाल बरामद हुए। इसके आधार पर महिला को हिरासत में लिया गया है। महिला द्वारा लगातार बहाने बनाए जाने के बावजूद उससे गहन पूछताछ की जा रही है। साथ ही अन्य पांच संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि वन विभाग आरोपियों के काफी करीब पहुंच चुका है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक बाघ के शिकार के लिए 11 केवी लाइन से करीब 800 मीटर लंबा तरंगित तार बिछाया गया था, जो एक सड़क के ह्यूम पाइप के नीचे से होकर जंगल तक गया था। इस मामले में भी एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिसके घर से करंट में इस्तेमाल किया गया तार बरामद हुआ है।

बाघ की मौत का मामला दो राज्यों और दो जिलों से जुड़ा होने के कारण जांच को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व, तमोर पिंगला अभ्यारण्य, प्रतापपुर व घूई वन परिक्षेत्र तथा बलरामपुर वन मंडल की टीमें संयुक्त रूप से जांच में जुटी हैं।

हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

इस बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यजीव वार्डन को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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