कलेक्टर की सख्ती बनाम समिति की मनमानीधान खरीदी केंद्र जगन्नाथपुर से उठे शोषण के सवाल

बिट्टू सिहं राजपूत, सूरजपुर। जिले में धान खरीदी अपने अंतिम चरण में है। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा समितियों और खरीदी केंद्रों का लगातार निरीक्षण कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से नियमित रूप से प्रेस नोट जारी कर यह बताया जा रहा है कि कहीं राइस मिलों को सील किया जा रहा है तो कहीं धान की शॉर्टेज पाए जाने पर समिति प्रबंधन को नोटिस थमाया जा रहा है। यह सभी कदम दर्शाते हैं कि जिले के संवेदनशील और सजग कलेक्टर किसानों के हितों को लेकर गंभीर हैं और व्यवस्था को दुरुस्त करने की मंशा रखते हैं।

किसान के मजदूर काम करते हुए

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ स्थानों पर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। प्रतापपुर जनपद क्षेत्र के जगन्नाथपुर धान खरीदी समिति केंद्र में किसानों के शोषण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि उनसे धान की तौलाई, सिलाई और बोरी में छल्ली लगाने जैसे कार्य जबरन कराए जा रहे हैं, जबकि शासन द्वारा इन कार्यों के लिए समिति प्रबंधन को प्रति बोरा अलग से भुगतान किया जाता है। बावजूद इसके लाखों रुपये आने के बाद भी किसानों से मुफ्त श्रम कराया जा रहा है।

छल्ली लगाते किसान द्वारा लाए मजदूर

इतना ही नहीं, किसानों और पत्रकारों के बीच संवाद को रोकने के लिए कथित तौर पर बाहरी लोगों को तैनात किया गया है, ताकि समिति की वास्तविक स्थिति सामने न आ सके। किसानों का आरोप है कि हर साल इसी तरह डर और दबाव बनाकर उनसे काम कराया जाता है, जिससे मजबूर होकर वे अपने खर्च पर मजदूर लाने को विवश होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, रकबा समर्पण के नाम पर भी किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि इस कार्य के लिए नियुक्त व्यक्ति के माध्यम से किसानों को डराकर उनका रकबा कम कराया जा रहा है और कथित रूप से कोचियों का धान खपाया जा रहा है।

एक ओर जहां जिला प्रशासन और कलेक्टर पारदर्शी धान खरीदी के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती बनकर सामने आई हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जगरनाथपुर समिति में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष और वास्तविक जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है, या फिर ये मामले कागजी जांच तक ही सीमित रह जाएंगे। किसानों को उम्मीद है कि कलेक्टर की सकारात्मक मंशा के अनुरूप उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।

पत्रकारों का वीडियो बनाने का नया दौर…

बीते कुछ दिनों से धान खरीदी समितियों में एक चिंताजनक और नया चलन सामने आ रहा है। पहले अंबिकापुर व कोरबा के कथित पत्रकारों से जुड़े वीडियो जशपुर और रायगढ़ की धान समितियों से सामने आए, और अब उसी कड़ी में समिति प्रबंधन द्वारा स्वयं पत्रकारों के वीडियो बनाने व उन्हें वायरल करने का ट्रेंड शुरू कर दिया गया है। इसे कहीं न कहीं वास्तविक पत्रकारों को डराने-धमकाने और चुप कराने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, ताकि किसान और मीडिया मिलकर समिति में चल रहे भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को उजागर न कर सकें।

मंगलवार को प्रतापपुर जनपद क्षेत्र के जगन्नाथपुर धान खरीदी समिति केंद्र में यही दृश्य देखने को मिला। आरोप है कि कथित रकबा समर्पण प्रभारी अपने कुछ साथियों के साथ पत्रकारों और किसानों के बीच चल रहे संवाद का वीडियो बनाने लगा और उसी दौरान किसानों को धमकी देने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद किसानों में आक्रोश भी देखने को मिला।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या रकबा समर्पण प्रभारी की नियुक्ति वास्तव में किसानों की सुविधा और समस्या समाधान के लिए की गई है, या फिर इसका उद्देश्य किसानों की निगरानी करना है ताकि वे समिति की हकीकत मीडिया तक न पहुंचा सकें। किसानों का आरोप है कि शासन से मिलने वाली सुविधाओं और राशि को मिलीभगत के जरिए आसानी से हजम करने के लिए ऐसे कथित प्रभारी तैनात किए गए हैं।

किसानों का यह भी कहना है कि जब उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि सामने मौजूद व्यक्ति पत्रकार है, उसके बावजूद वीडियो बनाना और माहौल डर का बनाना दर्शाता है कि समिति प्रबंधन का मकसद समस्या का समाधान नहीं, बल्कि सवाल उठाने वालों को खामोश करना है। ऐसे में अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह इस नए चलन को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई करेगा, या फिर पत्रकारों और किसानों पर दबाव बनाने की यह रणनीति यूं ही चलती रहेगी।

क्रमशः जारी……

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