हाथोर समाचार,प्रतापपुर। राष्ट्रीय पशु बाघ की करंट लगाकर की गई हत्या ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत घूई वन परिक्षेत्र के रेवटी बीट में शिकारियों द्वारा बाघ को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिए जाने की घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह घटना वन विभाग की घोर लापरवाही, उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का प्रत्यक्ष परिणाम है।

घटना के विरोध में ग्रामीणों ने सूरजपुर जिला वनाधिकारी (डीएफओ) को ज्ञापन सौंपकर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में कई दिनों से बाघ की गतिविधियां देखी जा रही थीं, बावजूद इसके वन विभाग द्वारा न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही किसी प्रकार की सतर्कता बरती गई। इसी लापरवाही का लाभ उठाकर शिकारियों ने बाघ को करंट लगाकर मार डाला।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रेवटी बीट में बाघ की हत्या के चार दिन बाद शव बरामद किया गया, जो विभागीय उदासीनता को और उजागर करता है। उनका कहना है कि रेवटी बीट के जिम्मेदार वन अधिकारी जयनारायण मेहता एवं सुनील केरकेट्टा नियमित रूप से अपने कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं रहते। वे कभी अंबिकापुर तो कभी अपने घर से ही आना-जाना करते हैं, जिससे क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि लचर व्यवस्था के चलते पूर्व में भी कई वन्य जीवों और पक्षियों की जान जा चुकी है, लेकिन हर बार जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया गया। इस मामले में केवल एक बीट गार्ड को निलंबित कर औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने वालों में ग्राम पंचायत रेवटी के सरपंच विष्णु सिंह, पंच वार्ड क्रमांक-6 शुभम गुप्ता, पूर्व मंडल महामंत्री अवधेश गुप्ता, वार्ड क्रमांक-5 राजपाल अगरिया, नीतीश पटेल, अनिल विश्वकर्मा, सीताराम पटेल, हिमालय पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।



