समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल से मिला दिव्यांग बच्चों को बड़ा शैक्षिक संबल ,दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के सपनों को मिली नई उड़ान

हाथोर समाचार ,रायपुर। बस्तर संभाग के दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल सामने आई है। जगदलपुर के आड़ावाल स्थित दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय को कक्षा बारहवीं तक उन्नत किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से अब दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को कक्षा पहली से बारहवीं तक तथा श्रवण बाधित विद्यार्थियों को कक्षा पहली से दसवीं तक निःशुल्क शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। यह विद्यालय बस्तर संभाग का एकमात्र ऐसा शिक्षण संस्थान है, जो विशेष रूप से दृष्टिबाधित बच्चों को उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा प्रदान करेगा।

यह विद्यालय छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित है, जहाँ दिव्यांग विद्यार्थियों को पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। पूर्व में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की पढ़ाई दसवीं कक्षा तक ही सीमित थी, जिससे आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें अन्य स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा मिलने से न केवल उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी उन्हें मजबूती मिलेगी।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशीलता और तत्परता उल्लेखनीय रही। विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती भगवती द्वारा दिए गए आवेदन पर मात्र एक माह के भीतर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कक्षा उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की गई। शिक्षिका ने मंत्री से भेंट कर आभार व्यक्त करते हुए इसे सैकड़ों दिव्यांग बच्चों के भविष्य को संवारने वाला निर्णय बताया।

यह उन्नयन राज्य सरकार की समावेशी शिक्षा नीति और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। बस्तर जैसे दूरस्थ अंचल में इस प्रकार की शैक्षिक सुविधा उपलब्ध होना सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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