नंदकुमार कुशवाहा! हाथोर समाचार ,बलरामपुर। प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है। पूर्व शिक्षा मंत्री एवं आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने विधायक के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए खुलकर मोर्चा खोल दिया है।

डॉ. टेकाम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र “प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है”। उन्होंने कहा कि इस प्रमाण पत्र में पिता के नाम की जगह पति का नाम लिखा गया है, जो कानूनी रूप से गलत है।
पूर्व मंत्री ने यह भी दावा किया कि विधायक मूल रूप से उत्तर प्रदेश की निवासी हैं, इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (ST) का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो विधायक के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
डॉ. टेकाम ने कहा कि “अगर कोई व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीतता है, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि आदिवासी समाज का भी अपमान है।” उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज इस पूरे मामले की स्वयं जांच कराएगा और यदि प्रमाण पत्र गलत पाया गया, तो FIR दर्ज कराई जाएगी।
बताया जा रहा है कि डॉ. टेकाम ने यह बयान आदिवासी समाज की एक सभा के दौरान दिया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभा में उन्होंने कहा कि समाज इस प्रकरण की जांच के लिए एक खोजबीन समिति गठित करेगा, जो सभी दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगा।
वहीं, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने भी मामले में गंभीरता जताते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो कार्यवाही की जाएगी।
फिलहाल, वाड्रफनगर से उठी यह राजनीतिक हलचल अब प्रतापपुर तक पहुँच चुकी है। एक ओर जहाँ पूर्व मंत्री ने FIR की मांग की है, वहीं अब सबकी नज़र प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि क्या विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या नहीं।



