हाथोर समाचार, अम्बिकापुर(बिट्टू सिंह राजपूत)। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभाव से ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बनते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सरगवां की निवासी अंजू गोलदार एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।

एक समय आर्थिक तंगी से जूझ रही अंजू गोलदार के लिए परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई एक बड़ी चुनौती थी। सीमित संसाधनों के कारण वे भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। ऐसे समय में ‘बिहान’ योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। योजना के तहत उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण की सुविधा प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने जर्सी नस्ल की दो गाय खरीदीं।
डेयरी व्यवसाय शुरू करने के बाद उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई। वर्तमान में अंजू को प्रतिमाह लगभग 20 से 22 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। सभी खर्चों को निकालने के बाद वे 12 से 15 हजार रुपये तक की नियमित बचत कर पा रही हैं। इस अतिरिक्त आय से उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे उनके भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
डेयरी से प्राप्त आय का सकारात्मक प्रभाव उनके कृषि कार्यों पर भी पड़ा है। अंजू अब खेती-किसानी में अधिक निवेश कर पा रही हैं, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस तरह डेयरी और कृषि, दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास ने उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाया है।
अंजू गोलदार अपनी सफलता का श्रेय राज्य शासन की योजनाओं को देती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाएं वास्तव में सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने अन्य ग्रामीण महिलाओं से भी अपील की है कि वे ‘बिहान’ योजना से जुड़कर अपनी रुचि के अनुसार आजीविका गतिविधियां अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें।
अंजू गोलदार की यह कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से कोई भी महिला अपने जीवन में बदलाव ला सकती है।



