हाथोर समाचार डॉट कॉम, सूरजपुर। जिले के प्रसिद्ध आस्था केंद्र मां कुदरगढ़ी देवी धाम में आयोजित कुदरगढ़ महोत्सव इस बार गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस महोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और जनभागीदारी का प्रतीक होना चाहिए था, वह अब कथित तौर पर दिखावे और सीमित लोगों तक सिमटकर रह गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम श्रद्धालुओं की भागीदारी और सुविधाओं को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि महोत्सव का लाभ मुख्य रूप से जिला प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और जनसंपर्क विभाग तक ही सीमित रह गया है। भव्य मंच, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भोजन व्यवस्था पर भारी खर्च किया जा रहा है, लेकिन इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा। वहीं, आयोजन में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और बंदरबांट की चर्चाएं तेजी से फैल रही हैं।
बताया जा रहा है कि इस महोत्सव के लिए विभिन्न माइन्स और अन्य स्रोतों से लाखों रुपये का योगदान मिला है, साथ ही शासन स्तर पर भी बड़ी राशि खर्च की गई है। इसके बावजूद व्यवस्थाओं की स्थिति और जनसहभागिता को लेकर निराशा का माहौल है। कई श्रद्धालु इसे धार्मिक आयोजन की बजाय औपचारिक कार्यक्रम करार दे रहे हैं।
सबसे अहम बात यह है कि स्थानीय मीडिया ने भी इस बार आयोजन से दूरी बना ली है, जो अपने आप में कई संकेत देता है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन की सफलता का प्रचार-प्रसार करने में जुटे हुए हैं।
इधर, क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि धार्मिक आस्था से जुड़े इस आयोजन में इसी तरह की अनदेखी और अव्यवस्था बनी रही, तो इसका असर जनभावनाओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल, कुदरगढ़ महोत्सव को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन और आयोजकों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और आने वाले दिनों में व्यवस्थाओं में सुधार होता है या नहीं।



