हाथोर समाचार,सूरजपुर। भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कपसरा के बिसाही पोड़ी में शुक्रवार की देर रात एक दर्दनाक घटना में किसान दंपती को दंतैल हाथी ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना के समय दोनों खलिहान में काटकर रखे धान की रखवाली कर रहे थे और पास ही बनी झोपड़ी में सो रहे थे। रात करीब 2 बजे झोपड़ी से सटे मिट्टी के अहाते का हिस्सा अचानक गिरा, जिसकी आवाज सुनकर पति-पत्नी बाहर निकले। इसी दौरान वहां मौजूद दंतैल हाथी ने उन्हें देखते ही सूंड से उठाकर पटक दिया और पैरों तले रौंदकर मार डाला।

मृतकों की पहचान कबिलास राजवाड़े (45) और उसकी पत्नी धनियारो (41) के रूप में हुई है। दोनों ने कुछ दिन पहले ही धान की कटाई कर खलिहान में रखा था और रोज की तरह झोपड़ी में रहकर उसकी रखवाली कर रहे थे। अहाता गिराने वाला हाथी उसी समय वहां पहुंचा था और दंपती जैसे ही बाहर निकले, उस पर हमला कर दिया।
ग्रामीणों ने सुबह देखा शव
अगली सुबह ग्रामीण जब खलिहान की ओर पहुंचे तो दंपती के क्षत-विक्षत शव पड़े मिले। घटना की सूचना आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। सूरजपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे, वहीं भटगांव पुलिस ने भी स्थल निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अलग-अलग क्षेत्रों में दो दंतैल हाथियों का विचरण
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दंपती पर हमला करने वाला दंतैल हाथी दल से बिछड़कर अकेला घूम रहा है। शुक्रवार रात वह लुंड्रा क्षेत्र से प्रतापपुर रोड की ओर आया और देर रात बिसाही पोड़ी पहुंचा। इसी दौरान यह हादसा हो गया। वहीं एक अन्य दंतैल हाथी मोहनपुर क्षेत्र में भी विचरण कर रहा है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं।
परिजनों को दी गई त्वरित सहायता राशि
घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम ने मृतक परिजनों को 25-25 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की। इस दौरान पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े और जिला पंचायत सदस्य अनुज राजवाड़े भी मौके पर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के लगाए आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में वन विभाग की लापरवाही लगातार सामने आती रही है। हाथियों का लोकेशन समय पर नहीं दिया जाता और न ही किसी प्रकार की रोकथाम के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं, जिसकी वजह से आए दिन हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हाथी नियंत्रण व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।



