कांकेर की घटना के विरोध में अंबिकापुर और सूरजपुर में सर्व समाज का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

हाथोर समाचार | अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में सर्व समाज के आह्वान पर कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में घटित कथित घटना के विरोध में जोरदार एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने ईसाई मिशनरियों द्वारा जनजातीय समाज पर किए गए कथित हमले, जबरन शव दफन तथा ग्रामीणों पर जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए कड़ी निंदा की। इस दौरान सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।

छत्तीसगढ़ बंद के आह्वान का अंबिकापुर में व्यापक असर देखने को मिला। शहर की अधिकांश दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे, जिससे जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आमाबेड़ा क्षेत्र की घटना ने प्रदेश के सर्व समाज को गहरे आक्रोश और असुरक्षा की भावना से भर दिया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक गरिमा और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में संगठित भूमिका की आशंका सामने आ रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि प्रदेश में पूर्व में अवैध धर्मांतरण, सामाजिक परंपराओं के उल्लंघन और जनजातीय समाज के साथ टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो सर्व समाज को आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

सूरजपुर में भी दिखा बंद का असर

सूरजपुर

वहीं सर्व समाज द्वारा आहूत छत्तीसगढ़ बंद का असर सूरजपुर जिले में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। सुबह से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें एवं व्यावसायिक गतिविधियां आंशिक रूप से बंद रहीं। प्रमुख चौक-चौराहों पर शांतिपूर्ण माहौल बना रहा और कहीं से भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

इस अवसर पर सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जनजातीय समाज की सुरक्षा, सामाजिक समरसता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहते हुए न्याय और शांति की मांग है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बंद के दौरान स्थिति पर सतत नजर रखी और शांति व्यवस्था सुनिश्चित की। पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि अंबिकापुर और सूरजपुर में सर्व समाज ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाई।

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