हाथोर समाचार, सूरजपुर। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर विभाग ने विगत सप्ताह अवैध खनिज परिवहन एवं उत्खनन में संलिप्त 8 वाहनों को जब्त करने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के कई प्रमुख मार्गों पर प्रतिदिन सैकड़ों रेत से भरे वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा है कि विभाग की कार्रवाई बड़े नेटवर्क पर अंकुश लगाने के बजाय केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।


कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर खनिज विभाग और जिला स्तरीय टास्कफोर्स द्वारा लगातार निगरानी किए जाने की बात कही जा रही है। विभाग के अनुसार 27 जून को रामानुजनगर में गिट्टी से भरी एक हाईवा, 28 जून को देवीपुर क्षेत्र में बोल्डर परिवहन के दो वाहन तथा रूनियाडीह-नमदगिरी सीमा से रेत परिवहन का एक वाहन पकड़ा गया। 30 जून को भैयाथान के बड़सरा में दो ट्रैक्टर और 1 जुलाई को कुरूवा के पंडितपारा रेत घाट से दो टिपरों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर संबंधित थानों में सुरक्षार्थ रखा गया है।
इधर स्थानीय लोगों का आरोप है कि खड़गवां रोड, सिलफिली रोड, लटोरी रोड और सपना-सुखरी मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में रेत से भरे वाहन गुजरते हैं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों और रेत कारोबारियों के बीच मिलीभगत होने से कार्रवाई से पहले ही सूचना लीक हो जाती है, जिससे बड़े वाहन बच निकलते हैं और केवल चुनिंदा वाहनों पर कार्रवाई होती है।
यदि वास्तव में अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती की जा रही है, तो सवाल यह है कि जिले की सड़कों पर रोजाना दिखाई देने वाले बड़ी संख्या में रेत वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? लोगों का मानना है कि केवल कुछ वाहन जब्त करने से अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगेगी। जरूरत पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान और लगातार प्रभावी कार्रवाई की है, ताकि प्रशासन की सख्ती जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे।



