डामरीकरण सड़क की पैच रिपेयरिंग में तकनीकी नियमों की अनदेखी, भ्रष्टाचार की चर्चा तेज ,वाड्रफनगर एसडीओ कार्यालय के अधीन है सड़क का मॉनिटरिंग

हाथोर समाचार ,सूरजपुर। जिले के अंबिकापुर–बनारस मार्ग पर कपसरा से वाड्रफनगर तक डामरीकरण सड़क की पैच रिपेयरिंग को लेकर इन दिनों भ्रष्टाचार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने के बावजूद यह सड़क बलरामपुर जिले के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है, जिसका संपूर्ण मॉनिटरिंग वाड्रफनगर एसडीओ कार्यालय से किया जाता है।

दो जिलों की सीमा में पड़ने के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर दोनों जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है। इसी प्रशासनिक शून्य का लाभ उठाकर ठेकेदार और विभागीय जिम्मेदार इस सड़क को कथित तौर पर भ्रष्टाचार का अड्डा बनाए हुए हैं। यह मार्ग न केवल मुख्य सड़क है, बल्कि इससे प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। सड़क किनारे नाली निर्माण, फुटपाथ निर्माण और अब पैच रिपेयरिंग जैसे कार्यों में गुणवत्ता से समझौते के आरोप सामने आ रहे हैं।

वर्तमान में सड़क पर पैच रिपेयरिंग का कार्य चल रहा है, लेकिन स्थानीय जानकारों का आरोप है कि कार्य के दौरान तकनीकी नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। गड्ढों की उचित कटिंग और सफाई किए बिना ही घटिया किस्म का डामर डालकर पैच भरा जा रहा है। न तो धूल और ढीली गिट्टी हटाई जा रही है और न ही आवश्यक टैक कोट व कम्पैक्शन पर ध्यान दिया जा रहा है।

आरोप यह भी है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारी इस बात से निश्चिंत हैं कि कार्य सूरजपुर जिले की सीमा में हो रहा है, जबकि नियंत्रण बलरामपुर जिले से है, ऐसे में मौके पर देखने और जवाबदेही तय करने वाला कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है। इसी कारण घटिया पैच रिपेयरिंग कर इसे मोटी कमीशन का जरिया बनाया जा रहा है।

क्या कहते है टेक्निकल जानकर..!

पैच रिपेयरिंग कार्य के दौरान कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्क्वेयर अथवा रेक्टेंगुलर कटिंग न किए जाने से गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित या तिरछी कटिंग से पैच के किनारों पर एज फेल्योर की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे वाहनों का भार समान रूप से सड़क संरचना पर स्थानांतरित नहीं हो पाता। इसके परिणामस्वरूप पैच के किनारों से दरारें विकसित होती हैं और डामर परत उखड़ने लगती है। साथ ही किनारों पर समुचित टैक कोट और पर्याप्त कम्पैक्शन नहीं होने से पानी का प्रवेश आसान हो जाता है, जिससे सब-बेस कमजोर होकर कुछ ही समय में पुनः गड्ढों का निर्माण हो जाता है। तकनीकी मानकों के अनुसार पैच रिपेयरिंग में 90 डिग्री वर्टिकल एज के साथ कटिंग, निर्धारित मात्रा में टैक कोट का छिड़काव तथा लेयर-वाइज कम्पैक्शन अनिवार्य है, तभी सड़क की गुणवत्ता और आयु सुनिश्चित की जा सकती है।

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